जानिए मज़दूर दिवस ने कैसे दिलाया मज़दूरों को सम्मान।

नई दिल्ली:- हर दिन एक नई शुरुआत लेकर आता है और हर दिन के साथ कोई न कोई इतिहास जुड़ा हुआ होता है और आज 1 मई है जिसके बारे में अधिकतर लोगों को पता नहीं होगा कि 1मई को “मज़दूर दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

ऐतिहासिक रूप से मजदूर/श्रम दिवस की शुरुआत अमेरिका में हुई थी जिसमें मजदूरों के लिए 8 घंटे के काम की वकालत करते हुए बिल पारित किया गया था और 1886 के बाद से मजदूरों /कर्मचारियों के द्वारा की गई कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए श्रम दिवस का जश्न शुरू हुआ।

हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि मजदूर हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक प्रगति की प्रेरणा शक्ति हैं। श्रमिक राजनीतिक क्षेत्रों में भी काफी प्रभावी हैं क्योंकि कुछ श्रमिक मुद्दों ने कई राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने में मदद की है, जैसे कि हम सभी बखूबी जानते हैं कि कोई भी कंपनी या संगठन बिना परिश्रम नहीं चल सकती लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी के लिए काम करने वाले किसी भी कर्मचारी को हम नज़रंदाज करें


कंपनी को 8 घंटे के काम के बाद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मजदूरों या कर्मचारियों के साथ जाति, धर्म, पंथ, लिंग, विकलांगता आदि के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव न किया जाए और उन्हें प्रतिस्पर्धी मजदूरी या वेतन का भुगतान होना चाहिए। इसके अलावा प्रत्येक श्रमिक पहले एक व्यक्ति है और इस प्रकार उनकी स्थिति या नौकरी को ध्यान में ना रखकर उनका सम्मान होना चाहिए।

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